Kisan organic and farming information

Kisan organic and farming information Organic farming and fertilizer, crops and plant information, organic products

06/07/2026

#अश्वगंधा

06/07/2026

ड्रैगन फ्रूट की खेती भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि इसकी बाजार में अच्छी मांग है और यह कई क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है।

जलवायु
20°C–35°C तापमान सबसे उपयुक्त रहता है।
कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी सिंचाई के साथ अच्छी खेती की जा सकती है।
पाले (फ्रॉस्ट) से पौधों की सुरक्षा जरूरी है।
मिट्टी
अच्छी जल निकासी वाली दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है।
मिट्टी का pH 5.5–7.0 आदर्श माना जाता है।
खेत में पानी नहीं रुकना चाहिए।
पौधों की रोपाई
ड्रैगन फ्रूट की खेती मुख्य रूप से कटिंग से की जाती है।
1.5–2 फीट लंबी स्वस्थ कटिंग लगाना बेहतर रहता है।
पौधे से पौधे की दूरी लगभग 2–3 मीटर रखें।
प्रत्येक पौधे के लिए सीमेंट या RCC का 6–7 फीट ऊंचा खंभा लगाया जाता है, जिस पर पौधा चढ़ता है।
खाद एवं उर्वरक
रोपाई के समय प्रति गड्ढे में 10–15 किलोग्राम अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद डालें।
समय-समय पर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश (NPK) संतुलित मात्रा में दें।
जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग भी लाभदायक है।
सिंचाई
गर्मियों में 5–7 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
सर्दियों में आवश्यकता अनुसार पानी दें।
ड्रिप सिंचाई सबसे प्रभावी मानी जाती है।
फूल और फल
रोपाई के लगभग 12–18 महीने बाद फल आना शुरू हो सकता है।
एक पौधा 15–25 वर्ष तक उत्पादन दे सकता है।
एक स्वस्थ पौधे से अच्छी देखभाल पर 20–40 किलोग्राम या उससे अधिक फल प्राप्त हो सकते हैं।
रोग एवं कीट
जड़ सड़न और तना सड़न से बचने के लिए जल निकासी अच्छी रखें।
आवश्यकता होने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उपयुक्त फफूंदनाशक या जैविक उपचार अपनाएं।
नियमित निरीक्षण से कीट एवं रोग का समय पर नियंत्रण किया जा सकता है।
लागत और आय
1 एकड़ में प्रारंभिक लागत (खंभे, पौधे, ड्रिप आदि सहित) लगभग ₹4 लाख से ₹8 लाख तक हो सकती है।
अच्छी देखभाल और बाजार मूल्य के अनुसार तीसरे वर्ष से अच्छा उत्पादन और लाभ मिलने लगता है।

यदि आप बताएं कि आप किस राज्य या जिले में खेती करना चाहते हैं, तो मैं वहां की जलवायु के अनुसार ड्रैगन फ्रूट की खेती का पूरा प्लान (एकड़वार लागत, पौधों की संख्या, खाद का शेड्यूल और संभावित आय) बता सकता हूँ।

06/07/2026

#ग्वार

06/07/2026

05/07/2026

#कमलम

05/07/2026

Horticulture Farming (बागवानी खेती)

हॉर्टिकल्चर (Horticulture) का हिंदी अर्थ बागवानी या उद्यानिकी है। यह कृषि की वह शाखा है जिसमें फल, सब्जियाँ, फूल, मसाले, औषधीय एवं सजावटी पौधों की वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाती है।

उद्यानिकी (Horticulture) के प्रमुख प्रकार
फलोत्पादन (Pomology) – आम, केला, अमरूद, सेब, संतरा आदि फलों की खेती।
सब्जी उत्पादन (Olericulture) – टमाटर, आलू, प्याज, गोभी, भिंडी आदि की खेती।
पुष्पोत्पादन (Floriculture) – गुलाब, गेंदा, चमेली, ऑर्किड जैसे फूलों की खेती।
मसाला एवं औषधीय पौधों की खेती – हल्दी, अदरक, इलायची, तुलसी, अश्वगंधा आदि।
लैंडस्केप एवं सजावटी पौधों की खेती – पार्क, बगीचे और सजावटी पौधों का विकास।
हॉर्टिकल्चर खेती के लाभ
कम भूमि में अधिक आय की संभावना।
फलों, फूलों और सब्जियों की बाजार में अच्छी मांग।
रोजगार के अधिक अवसर।
पोषण सुरक्षा में योगदान।
निर्यात के माध्यम से अतिरिक्त आय की संभावना।
चुनौतियाँ
नाशवान फसलें होने के कारण कोल्ड स्टोरेज और परिवहन की आवश्यकता।
मौसम और कीट-रोगों का अधिक प्रभाव।
बाजार कीमतों में उतार-चढ़ाव।
भारत में प्रमुख बागवानी फसलें
फल: आम, केला, अंगूर, अमरूद, संतरा
सब्जियाँ: टमाटर, आलू, प्याज, बैंगन
फूल: गुलाब, गेंदा, रजनीगंधा
मसाले: हल्दी, अदरक, काली मिर्च, इलायची

सरल परिभाषा:
"हॉर्टिकल्चर (उद्यानिकी) वह कृषि प्रणाली है जिसमें फल, सब्जियाँ, फूल, मसाले और औषधीय पौधों की वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक खेती की जाती है।"

05/07/2026

#पपीता

04/07/2026

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125103

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