21/06/2026
फादर्स डे पर एक याद...
आज फादर्स डे है। सच कहूं तो मैंने कभी इसे खास तौर पर नहीं मनाया, क्योंकि बचपन में ही पापा का साथ छूट गया था। लेकिन उनकी दी हुई सीख आज भी मेरे साथ चलती है, जैसे वो खुद मेरे साथ हों। बचपन की एक बात आज भी ज़ेहन में ताज़ा है। मैं साइकिल चलाता था और एक दिन उसका टायर खराब हो गया। पापा ने कुछ पैसे दिए और कहा, "बेटा, गोल कोठी से नया टायर ले आओ। मैंने तुरंत मना कर दिया। मैंने कहा, "मैं हाथ में टायर लेकर पैदल नहीं आऊंगा, लोग क्या कहेंगे? मेरी बात सुनकर पापा को गुस्सा तो आया, लेकिन उन्होंने मुझे डांटने या मारने के बजाय समझाया। उन्होंने कहा,
बेटा, कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। अपने काम को खुद करना शर्म की बात नहीं, बल्कि गर्व की बात है। टायर हाथ में लेकर आने से तुम्हारी इज्जत कम नहीं होगी, बल्कि लोग यही कहेंगे कि यह लड़का अपने काम खुद करता है और अपनी चीज़ों की जिम्मेदारी समझता है। उनकी बात मेरे दिल में उतर गई। फिर मैं खुशी-खुशी गया और पूरे रास्ते टायर को हाथ से घुमाते, खेलते-कूदते घर ले आया।
आज पापा इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी वह सीख हर दिन मेरे साथ है। जिंदगी ने सिखाया कि इंसान की पहचान उसके कपड़ों, पैसे या दिखावे से नहीं होती, बल्कि उसकी मेहनत, जिम्मेदारी और अपने काम खुद करने की आदत से होती है। फादर्स डे पर अपने पापा को याद करते हुए बस इतना ही कहना चाहता हूं— "पापा, आपका साथ भले ही जल्दी छूट गया, लेकिन आपकी सीख आज भी मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।"
💙 Happy Father's Day — मुदस्सिर अली, खाता खेड़ी, सहारनपुर