13/08/2026
*🌹 सीरत-ए-रसूल ﷺ*
*बातें मेरे हुज़ूर की ﷺ*
*🌿 तिब्ब-ए-नबवी*
*🍯 शहद और क़ुरआन*
आप ﷺ ने यह भी फ़रमाया कि दो शिफ़ाओं को लाज़िम पकड़ो—एक शहद, दूसरी क़ुरआन शरीफ़।
(इब्ने माजा, सफ़्हा २५५, बाबुल-असल)
🍶 ख़ल (सिरका)
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया कि बेहतरीन सालन सिरका है।
ऐ अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल! सिरके में बरकत अता फ़रमा, क्योंकि यह अम्बिया अलैहिमुस्सलाम का सालन है और जिस घर में सिरका होगा, वह घर कभी मोहताज नहीं होगा।
(इब्ने माजा, सफ़्हा २४६, बाबुल-इतिदाम बिल-ख़ल)
🫒 ज़ैत (रोग़न-ए-ज़ैतून)
हुज़ूर-ए-अक़दस ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि तुम लोग रोग़न-ए-ज़ैतून को सालन के तौर पर इस्तेमाल करो और उसको बदन पर भी मलते रहो, क्योंकि यह मुबारक दरख़्त से निकला हुआ है।
और दूसरी हदीस में यूँ वारिद हुआ कि तुम लोग रोग़न-ए-ज़ैतून को खाओ और उसको बदन में लगाओ, क्योंकि यह बरकत वाली चीज़ है।
(इब्ने माजा, सफ़्हा २४६, बाबुज़-ज़ैत)
🌿 मुसम्मिन
(बदन को फ़र्बह करने वाली दवा)
हज़रत आयशा رضی اللہ تعالیٰ عنہا कहती हैं कि मेरी वालिदा ने जब मेरी रुख़्सती का इरादा किया तो मेरा इलाज करने लगीं कि मैं ज़रा फ़र्बह-बदन हो जाऊँ, मगर कोई इलाज कारगर न हुआ।
मगर जब मैंने ककड़ी को ताज़ा खजूरों के साथ खाना शुरू किया, तो मैं ख़ूब फ़र्बह-बदन वाली हो गई।
(इब्ने माजा, सफ़्हा २४६)
हज़रत अब्दुल्लाह बिन जाफ़र رضی اللہ تعالیٰ عنہ कहते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ककड़ी ताज़ा खजूरों के साथ تناول फ़रमाया करते थे।
(इब्ने माजा, सफ़्हा २४६, बाबुल-क़िस्सा वर-रुतब)
🌙 अशा
(रात का खाना)
हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि रात का खाना तर्क न करो। कुछ न मिले तो एक मुट्ठी खजूर ही खा लिया करो, क्योंकि रात को खाना छोड़ देने से जल्द बुढ़ापा आ जाता है।
(इब्ने माजा, सफ़्हा २४८, बाबु तर्किल-अशा)
🌿 हिम्या
(मुज़िर चीज़ों से परहेज़)
हुज़ूर ﷺ अपने साथ हज़रत अली رضی اللہ تعالیٰ عنہ को लेकर हज़रत उम्मुल-मुंज़िर सहाबिया رضی اللہ تعالیٰ عنہا के मकान पर तशरीफ़ ले गए।
उन्होंने कच्ची-पक्की खजूरों का एक ख़ुशा पेश किया और हुज़ूर ﷺ उसमें से खाने लगे। हज़रत अली رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने भी हाथ बढ़ाया तो आप ﷺ ने फ़रमाया:
“ऐ अली رضی اللہ تعالیٰ عنہ! अभी बीमारी से उठे हो और नक़ाहत बाक़ी है, इसलिए तुम इसे मत खाओ।”
इसके बाद हज़रत उम्मुल-मुंज़िर رضی اللہ تعالیٰ عنہا ने जौ और चुकंदर मिला कर खाना पकाया तो हुज़ूर ﷺ ने हज़रत अली رضی اللہ تعالیٰ عنہ से फ़रमाया कि तुम यह खाओ, यह तुम्हारे लिए बहुत ज़्यादा मुफ़ीद ग़िज़ा है।
(इब्ने माजा, सफ़्हा २५४, बाबुल-हिम्या)
हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि तुम लोग ज़बरदस्ती करके अपने मरीज़ों को खाने-पीने पर मजबूर न किया करो, अल्लाह तआला उन लोगों को खिला-पिला दिया करता है।
(इब्ने माजा, सफ़्हा २५४, बाबु ला तकरहू अल-मरीज़ अलत्तआम)
🌿 ज़न्जबील (सोंठ)
बादशाह-ए-रूम ने एक घड़ा ज़न्जबील से भरा हुआ आप ﷺ के पास हदियतन भेजा था। आप ﷺ ने उसमें से एक-एक टुकड़ा अपने असहाब رضی اللہ تعالیٰ عنہم को खाने के लिए दिया।
इस रिवायत को अबू नईम मुहद्दिस ने अपनी किताब “तिब्ब-ए-नबवी” में बयान किया है।
(नशरुत-तीब)
🌴 अज्वा
अज्वा मदीना मुनव्वरा की खजूरों में से एक खजूर का नाम है। इसके बारे में इरशाद-ए-नबवी ﷺ है:
“अज्वा जन्नत से है और वह जुनून या ज़हर से शिफ़ा है।”
(इब्ने माजा, सफ़्हा २५५, बाबुल-कमआ वल-अज्वा)
🌹 बशुक्रिया:
About Muhammad Net