Thakur Dalip Singh ji di Pehel

Thakur Dalip Singh ji di Pehel Ik Nawi Soch..

22/08/2026

सिखों को भगवान श्री कृष्ण जी का जन्मदिन क्यों मनाना चाहिए?
Sikhan nu Bhagwan Shri Krishna Ji da janamdin kyon manana chahida hai?
ਸਿੱਖਾਂ ਨੂੰ ਭਗਵਾਨ ਸ੍ਰੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਜੀ ਦਾ ਜਨਮਦਿਨ ਕਿਉਂ ਮਨਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ?

Sikh, Shri Krishna Janmashtami, Bhagwan Shri Krishna, Sikh Dharm, Sikh History, Hindu Sikh Unity, Sanatan

19/08/2026

ਗੁਰੂ ਸੇਵਾ ਨਾਲ ਅਸਾਦ ਰੋਗ ਸਮਾਪਤ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ।
Guru seva naal asadh rog samapt ho jaande han.

ਭਾਰਤੀ ਦੇਸੀ ਮਿਤੀभारती देसी मितिBharti Desi Miti
17/08/2026

ਭਾਰਤੀ ਦੇਸੀ ਮਿਤੀ
भारती देसी मिति
Bharti Desi Miti

भारतवासियो जागो, आत्मसम्मान लाओBharatvasiyo Jago, Atmasamman Lao
15/08/2026

भारतवासियो जागो, आत्मसम्मान लाओ
Bharatvasiyo Jago, Atmasamman Lao

14/08/2026

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया’ नाम के प्रयोग को पूर्ण रूप से समाप्त किया जाए।
Antarrashtriya star par ‘India’ naam ke prayog ko poorn roop se samaapt kiya jaye.

12/08/2026

हर घर तिरंगा झंडा लहराओ।
Har Ghar Tssrianga Jhanda Lehrao

यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता!   (भाग – 1)  ठाकुर दलीप सिंघ जीआप कल्पना भी नहीं कर सक...
10/08/2026

यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता! (भाग – 1)
ठाकुर दलीप सिंघ जी
आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि यदि भारत ने इंग्लैंड की तरह विश्व पर साम्राज्य स्थापित किया होता; तो भारतीय भाषाएं कितनी समृद्ध होती! जिस तरह आज ‘इंग्लिश’ विश्व पर शासन कर रही है, उसी तरह ही भारतीय भाषाएं भी विश्व पर शासन करती। आज विश्व में अंग्रेज़ी की बजाय ‘भारतीय’ भाषा का ही प्रयोग होता और वह कोई भी एक भारतीय भाषा ही ‘अंतर्राष्ट्रीय’ भाषा होती। जिस प्रकार अंग्रेज़ी के बिना आज लोगों का जीवित रहना भी असंभव जैसा है; यदि भारत ने विश्व पर साम्राज्य स्थापित किया होता, तो भारतीय भाषा के बिना भी लोगों का जीवित रहना असंभव जैसा हो जाता। अंग्रेज़ी की तरह ही लोग चाह कर भारतीय भाषा पढ़ते; क्योंकि, भारत के अधीन होने के कारण, भारतीय भाषा पढ़ना उन की मजबूरी बन जानी थी; जैसे इंग्लैंड के अधीन रहने के कारण अंग्रेज़ी पढ़ना, आज पूरे विश्व की मजबूरी बन गई है। परंतु, विश्व पर साम्राज्य स्थापित करने हेतु तथा उस साम्राज्य को लंबे समय तक कायम रखने हेतु: क्रूरता व कुटिलता जैसे अनैतिक-अधर्म कार्य करने राजनीति की मजबूरी है, जो इंग्लैंड की तरह भारत ने नहीं किए। अनैतिक कार्य करने का फल: इंग्लैंड प्रफुल्लित हो कर भोग रहा है। परंतु, इंग्लैंड के अनैतिक कार्यों के कारण; पूरा विश्व अपनी संस्कृति, भाषाएं, मज़हब आदि खो कर, नैतिकता कारण अधीनगी का फल भोग रहा है। इसी प्रकार से, अनैतिक कार्य न करने का फल: भारत अपनी स्वतंत्रता, भाषाएं, संस्कृति, मज़हब तथा भारत भूमि का बड़ा भाग खो कर भोग रहा है।
विशेष: पाठक जन! इस लेख पर आपत्ति करने से पहले इस का तत्व समझिए। जिस का साम्राज्य हो; उसी की भाषा राजकीय कार्यों में चलती है एवं प्रफुल्लित हो कर लोगों में प्रचलित होती है। क्योंकि, वह भाषा पढ़ना व उस का उपयोग करना: लोगों की मजबूरी बन जाती है। यदि उस का साम्राज्य न भी रहे; तो भी उसी साम्राज्य की भाषा, लंबे समय तक अपना प्रभाव रखती है। अंग्रेज़ी का ‘अंतर्राष्ट्रीय भाषा’ बन कर, आज पूरे विश्व के लोगों की आवश्यकता बनने का एक ही विशेष कारण है; इंग्लैंड का विश्व के बहुत बड़े भाग पर साम्राज्य स्थापित करना। यदि आप लेख के इस तत्व को समझ कर, जीवन की सच्चाई को स्वीकार करें गे, तो मेरे विचारों से अवश्य सहमत हो जाएं गे। यदि मेरी बात आप की समझ में नहीं आ रही, आप को स्वीकार नहीं हो रही; तो, अंग्रेज़ी का पूर्ण रूप से बहिष्कार कर के, केवल एक दिन के लिए ही आप जीवित रह कर देखिए। आप को अपने आप ही पता चल जाएगा कि आप अंग्रेज़ी-उपयोग के बिना जीवित ही नहीं रह सकते। विश्व के सभी बड़े साम्राज्य: क्रूरता, हिंसा, कपट, अनैतिक-अधर्म कार्य कर के ही स्थापित हुए हैं एवं उपरोक्त कुकर्मों को करते हुए ही स्थापित रहे हैं। केवल सेवा, पर-उपकार जैसे नैतिक और धर्म कार्य कर के, कोई बड़ा साम्राज्य कभी भी स्थापित नहीं हुआ, ना ही हो सकता है ।
यह सर्व विदित है कि यूरोप के कुछ देशों (इंग्लैंड, फ्रांस, हॉलैंड, स्पेन आदि): विशेष रूप से इंग्लैंड ने, विश्व के अधिकत्तर देशों को गुलाम बना कर, अपना साम्राज्य स्थापित किया था। जिस में से एक बहुत बड़े भाग पर अब तक भी उन्हीं का शासन है, जैसे: ऑस्ट्रेलिया (Australia), कनाडा (Canada) एवं कई छोटे-छोटे देश: इंग्लैंड के अधीन हैं। ग्वाडेलोप (Guadeloupe), गुयाना (Guyana), मैयट (Mayotte), फ्रेंच पोलिनेशिया (French Polynesia) आदि देश: फ्रांस के अधीन हैं। अरब प्रायद्वीप (Arabian Peninsula), कैनरी द्वीप समूह (Canary Islands), उत्तरी अफ्रीका के सेउटा और मेलिला शहर (North African cities of Ceuta and Melilla) आदि क्षेत्र: स्पेन के अधीन हैं।
ऐसा विश्वास किया जाता है कि किसी भी देश के मूल निवासियों पर अत्याचार कर के व गुलाम बना कर, उन का शोषण करना तथा उन पर शासन करना; बहुत बड़ी अनैतिकता तथा अधर्म है, जिस का बहुत बड़ा दंड/पाप: शोषण करने वाले लोगों को लगता है। इन यूरोपीय देशों को उन अनैतिक कुकर्मों का दंड/पाप लगना चाहिए था। परंतु, इस के विपरीत, इन यूरोपीय देशों को इतने बड़े ऐसे अनैतिक/पाप कर्म करने का, यह फल मिला है; कि जहां-जहां भी उन्होंने साम्राज्य स्थापित किया, वहां पर उन की जन संख्या, भाषा, मज़हब तथा संस्कृति प्रफुल्लित हो कर स्थापित हो गये! गुलाम देशों के मूल निवासियों की जन संख्या, भाषा, मज़हब तथा संस्कृति इन विदेशी अत्याचारियों के शासन व गुलामी के कारण लुप्त होने की कगार पर हैं। जिस का प्रत्यक्ष उदाहरण यूरपीयों की अपनी लिखत में ही मिलता है: उत्तरी अमरीका एवं दक्षिणी अमरीका पर अपना साम्राज्य स्थापित करने हेतु, यूरोपीय लोगों ने वहां के 56 लाख लोगों को मारा है।
इस से यह प्रत्यक्ष होता है कि अपनी भाषा व संस्कृति को प्रफुल्लित करने हेतु; विश्व के बड़े भाग पर साम्राज्य स्थापित करना अनिवार्य है। वह साम्राज्य स्थापित करना, केवल नैतिकता या धर्म कार्यों से संभव नहीं। यह भी कटु सत्य है कि कम से कम 50% अनैतिकता तथा क्रूरता से ही साम्राज्य स्थापित होता है तथा स्थापित रहता है; भले ही समाज इस ढंग को कितना भी अनैतिक तथा अपराधिक मानता है । परंतु, साम्राज्य स्थापित कर के, केवल लोगों का शोषण व उन पर अत्याचार करने से कोई भाषा, मज़हब तथा संस्कृति; गुलाम देश के लोगों के जीवन का अंग नहीं बन जाती। जब लंबे समय तक साम्राज्य के मंत्री, अधिकारी तथा उन के लोग; गुलाम हुए देश में रहते हैं; तो जो भाषा वह उपयोग करते हैं और जो कार्य वह करते हैं; गुलाम देश की जनता उन के सभी कार्यों की, अपने आप नकल करने लग जाती है। क्योंकि, मानवी स्वभाव है कि धनहीन प्रजा, धनी व सत्तारूढ़ व्यक्ति की नकल करती है। सब से धनवान और शक्तिशाली तो साम्राज्य का स्वामी और उस के अधिकारी/मंत्री होते हैं। इस प्रकार से, साम्राज्य स्थापित करने वाले देशों की भाषा, मज़हब व संस्कृति भी: बिना अधिक अत्याचार किए, बिना अधिक परिश्रम किए, अपने आप ही गुलाम देश में प्रफुल्लित होने लगते हैं। नकल करने का मानवीय स्वभाव होने के कारण ही, आज पूरे विश्व में इंग्लैंड व यूरोपीय देशों की भाषा, मज़हब व संस्कृति प्रफुलित हो कर फैल गए हैं।
इस लिए, जिस ने भी अपनी भाषा, मज़हब तथा सभ्यता को सुरक्षित कर के प्रफुल्लित करना हो; उस के लिए बड़ा सम्राज्य स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। बड़ा सम्राज्य स्थापित करने हेतु, इन यूरपीय देशों जैसे अनैतिक कार्य भी करने पड़ते हैं; तभी सम्राज्य स्थापित होता है, एवं स्थापित रहता है। इस का प्रत्यक्ष उदाहरण है: मानव जाति का पृथ्वी पर साम्राज्य स्थापित कर के, उस पर रहते सभी जीव-जंतुओं एवं वनस्पति पर शासन करना तथा उन का शोषण करना। मानव जाति ने हर प्रकार के अनैतिक, अधर्म कार्य (क्रूरता, कपट आदि) कर के ही, पृथ्वी पर साम्राज्य स्थापित किया है। क्योंकि, मानव सभी जीवों में से अधिक शैतान, क्रूर, कपटी एवं लालची (अधर्मी) है।
संपर्क: +91 9023150008, +91 9041000625, +91 9650066108
Email : [email protected]

01/08/2026

ਗਰੀਬ ਨਾਮਧਾਰੀ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨਾਲ ਮਿਲੀਏ, ਉਹਨਾਂ ਦਾ ਦੁੱਖ ਸੁਣੀਏ।
Gareeb Namdhari parivaraan naal miliye, ohna da dukh suniye.
गरीब नामधारी परिवारों से मिलें, उनका दुःख सुनें।
Let us meet underprivileged Namdhari families and listen to their struggles.

22/07/2026

ਗੁਰਬਾਣੀ ਸਿੱਖਾਂ ਦਾ ਸੰਵਿਧਾਨ ਹੈ।
Gurbani Sikhan Da Samvidhan Hai.
Gurbani is the Constitution of Sikhs.
"Gurbani is the guiding light of a Sikh's life. Living according to its teachings is the true essence of Sikhi."

"ਜਦੋਂ ਆਪਣੇ ਹੀ ਕਿਸੇ ਸਹਾਰੇ ਦੀ ਉਡੀਕ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋਣ , ਉਦੋਂ ਬਾਹਰ ਦਾਨ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਆਪਣੇ ਫ਼ਰਜ਼ ਨੂੰ ਯਾਦ ਰੱਖੋ।""Jadon aapne hi kise...
17/07/2026

"ਜਦੋਂ ਆਪਣੇ ਹੀ ਕਿਸੇ ਸਹਾਰੇ ਦੀ ਉਡੀਕ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋਣ , ਉਦੋਂ ਬਾਹਰ ਦਾਨ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਆਪਣੇ ਫ਼ਰਜ਼ ਨੂੰ ਯਾਦ ਰੱਖੋ।"
"Jadon aapne hi kise sahaare di udeek kar rahe hon, udon baahar daan karan ton pehlan aapne farz nu yaad rakho."

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