Danmu

Danmu It is Registerd Trade Union that works towards the help of all Building and Other Construction worke

الله أكبر ، الله أكبر الله أكبر لا إله إلا الله ، والله أكبر الله أكبر ولله الحمدOn the occasion of this Eid-ul-Adha, Sa...
27/05/2026

الله أكبر ، الله أكبر الله أكبر لا إله إلا الله ، والله أكبر الله أكبر ولله الحمد
On the occasion of this Eid-ul-Adha, Sacrifice not only 🐐 but Ego, Bad Spirit, Evil Deeds and bring Social Equality..May Allah Bless Prosperity and Safety to You, Your family & Humanity..May this Eid-ul-Adha fulfill your life with more happiness, healthy, peace & friendship...

On the auspicious occasion of Eid al-Adha, I extend my heartfelt greetings to all. May the divine blessings of Allah bring immense joy, peace, and prosperity into your lives. Let us embrace the true essence of sacrifice, share our happiness, and strengthen the bonds of brotherhood. Praying for harmony in India.
Eidal-Adah Mubarak!

ईद-उल-अज़हा के इस अवसर पर मैं देशवासियों को दिल से शुभकामनाएं देता हूँ। यह त्यौहार हमें त्याग, समर्पण और मानवता की सेवा का संदेश देता है।

आज जब हम समाज को एकजुट और सशक्त बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं, तो हमें यही सोच रखनी चाहिए कि हमारी हर कुर्बानी केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के हित में हो।

आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें, जहाँ हर वर्ग, हर धर्म, और हर नागरिक को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षा मिले।

यह पर्व हमें प्रेरित करे कि हम दूसरों की भलाई के लिए भी कुछ त्याग करें, और मिलकर एक समावेशी, शांतिपूर्ण और समृद्ध समाज की ओर कदम बढ़ाएँ।

तमाम अहले वतन के साथ आप को ईद-उल-अजहा की बहुत बहुत मुबारकबाद.... अल्लाह से दुआ करता हूँ कि इस मुबारक मौके पर हम सभी के दिलों की नफ़रतें, अदावते, अना, गुरूर और बुराइयों को भी इस मौके पर कुर्बान कर दे और अमन, दोस्ती, भाईचारे की फज़ा मुल्क़ और समाज में कायम व दायम रखें, अमीन.......!
🌹🌹🤲🤲🌹🌹

Eid-Ul-Adha-Mubark

22/05/2026

साथियों,
*_आप सभी को यह महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए हर्ष हो रहा है कि आज बोर्ड के सचिव महोदय से हुई विस्तृत बातचीत में यह अवगत कराया गया कि दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा लगभग 4500 श्रमिक साथियों के खातों में Subsistence Amount सफलतापूर्वक भेज दी गई है।_*

यह केवल एक भुगतान नहीं, बल्कि मजदूर एकता, संघर्ष और लगातार किए गए संयुक्त प्रयासों की बड़ी जीत है। पिछले लंबे समय से अनेक श्रमिक साथियों को आधार सीडिंग, बैंक सत्यापन तथा अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हो पा रही थी। इस गंभीर विषय को NMAA द्वारा लगातार बोर्ड एवं संबंधित अधिकारियों के समक्ष मजबूती से उठाया गया।

*NMAA के प्रतिनिधियों द्वारा लगातार बैठकें, पत्राचार, फॉलोअप और श्रमिक हित में किए गए निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि हजारों मजदूर परिवारों को राहत मिल सकी है। संगठन ने हर स्तर पर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि किसी भी श्रमिक साथी का हक बाधित न हो और सभी पात्र श्रमिकों तक सहायता राशि पहुंचे।*

यह उपलब्धि उन सभी साथियों की एकजुटता और विश्वास का परिणाम है जिन्होंने संगठन के संघर्ष को मजबूती प्रदान की।

*_NMAA हमेशा मजदूरों के अधिकार, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा है और आगे भी प्रत्येक श्रमिक साथी की समस्याओं के समाधान हेतु निरंतर संघर्ष करता रहेगा।_*

साथियों,
यह समय और अधिक संगठित होने, जागरूक रहने तथा अपने अधिकारों की लड़ाई को एकजुट होकर आगे बढ़ाने का है। आपकी एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।.

मजदूर एकता — जिंदाबाद!
NMAA — जिंदाबाद!
संघर्ष ही अधिकार दिलाता है!

19/05/2026

• उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी का बयान मजदूर वर्ग और ट्रेड यूनियन आंदोलन के खिलाफ दुर्भाग्यपूर्ण एवं असंवैधानिक।

• ट्रेड यूनियन ने ही मजदूरों को अधिकार, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा दिलाई।

• उद्योगों की बदहाली के लिए कॉर्पोरेटपरस्त नीतियां, निजीकरण और गलत आर्थिक फैसले जिम्मेदार।

• श्रमिक संगठनों पर हमला लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना पर हमला।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा एक समाचार पत्र के कार्यक्रम में ट्रेड यूनियनों को उद्योगों के बंद होने और मजदूरों की बदहाली के लिए जिम्मेदार ठहराना न केवल तथ्यहीन और गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह देश के गौरवशाली मजदूर आंदोलन, भारतीय संविधान और श्रमिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का भी अपमान है।

देश के विभिन्न मजदूर संगठनों ने मुख्यमंत्री के इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि ट्रेड यूनियनें किसी उद्योग को बंद करने के लिए नहीं, बल्कि उद्योगों में श्रमिकों के हितों की रक्षा, सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक मजदूरी, सुरक्षित कार्यस्थल और औद्योगिक शांति स्थापित करने के लिए अस्तित्व में आई थीं।

आज प्रेस को जारी बयान में भारतीय राष्ट्रीय प्रवासी मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव अमजद हसन ने कहा कि विश्व इतिहास गवाह है कि औद्योगिक क्रांति के दौरान पूंजीपतियों द्वारा मजदूरों का अमानवीय शोषण किया गया। मजदूरों से 16-18 घंटे तक काम लिया जाता था, उन्हें न्यूनतम वेतन, सुरक्षा और मानवीय जीवन की बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे कठिन दौर में मजदूरों ने संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया और लंबे आंदोलनों, हड़तालों एवं बलिदानों के बाद ट्रेड यूनियन आंदोलन अस्तित्व में आया।

उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनें आधुनिक लोकतांत्रिक समाज की एक महत्वपूर्ण संस्था हैं, जिन्होंने मजदूरों को आठ घंटे कार्यदिवस, न्यूनतम मजदूरी, बोनस, पीएफ, ईएसआई, मातृत्व लाभ, पेंशन, दुर्घटना मुआवजा, सामाजिक सुरक्षा, साप्ताहिक अवकाश, सुरक्षित कार्यस्थल और श्रम कानूनों जैसे अधिकार दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।*

आज देश के करोड़ों मजदूर जिन अधिकारों का लाभ उठा रहे हैं, वे किसी सरकार या उद्योगपति की दया से नहीं बल्कि ट्रेड यूनियन आंदोलनों के लंबे संघर्षों का परिणाम हैं।

हसन ने कहा कि भारत में ट्रेड यूनियन का अधिकार कोई दया नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है। वर्ष 1926 में ट्रेड यूनियन अधिनियम लागू हुआ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत संगठन बनाने का अधिकार मौलिक अधिकार के रूप में दिया गया। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा ट्रेड यूनियनों को उद्योग बंद होने का जिम्मेदार बताना संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। यह बयान मजदूर वर्ग को कमजोर करने और कॉर्पोरेट हितों को मजबूत करने वाली सोच को दर्शाता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा कानपुर की मिलों का उदाहरण दिए जाने पर कहा कि कानपुर की वस्त्र मिलें ट्रेड यूनियनों के कारण नहीं, बल्कि सरकारों की गलत आर्थिक नीतियों, निजीकरण और कॉर्पोरेटपरस्त फैसलों के कारण बंद हुईं। सच्चाई यह है कि रिलायंस, रेमण्ड, विमल इन जैसे अन्य टेक्सटाइल जैसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए कानपुर की एनटीसी और बीआईसी की मिलों को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया गया।

वर्षों तक उत्पादन बंद रखकर मजदूरों को वेतन दिया गया और बाद में भाजपा नेतृत्व वाली सरकारों ने मिलों को पूरी तरह बंद कर उनकी हजारों करोड़ की जमीनें रियल एस्टेट कारोबारियों के हवाले कर दीं। यह केवल कानपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि देशभर में सार्वजनिक उद्योगों को निजीकरण और विनिवेश की नीति के तहत खत्म किया गया।

हसन ने कहा कि उद्योगों की बदहाली के असली कारण नव-उदारवादी आर्थिक नीतियां, नोटबंदी, गलत जीएसटी व्यवस्था, निवेश में कमी, बढ़ती महंगाई, बिजली और कच्चे माल की लागत में वृद्धि, भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और सरकारों की गलत नीतियां हैं। सरकारी आंकड़े स्वयं बताते हैं कि पिछले वर्षों में लाखों छोटे, मझोले (MSME) और बड़े उद्योग आर्थिक नीतियों की विफलताओं के कारण बंद हुए। इसके बावजूद मजदूर संगठनों को दोष देना वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनें उद्योग विरोधी नहीं बल्कि श्रमिक और उद्योग दोनों के हित में कार्य करती हैं। इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जब मजदूर संगठनों ने उद्योगों को बचाने, उत्पादन बढ़ाने और औद्योगिक शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरक्षित, प्रशिक्षित और संतुष्ट मजदूर ही किसी उद्योग की वास्तविक ताकत होते हैं। श्रमिकों के अधिकारों का हनन कर कोई भी अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।

ध्यान देने की बात है भाजपा शासित राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश में आज श्रमिक अत्यंत दयनीय परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। सरकार ने श्रम कानूनों को कमजोर करते हुए कारखाना अधिनियम में संशोधन कर कार्य के घंटे 12 तक बढ़ा दिए। नए लेबर कोड के माध्यम से न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, यूनियन बनाने, सामूहिक सौदेबाजी और श्रमिक हितों की रक्षा से जुड़े अधिकारों को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में पिछले 12 वर्षों से न्यूनतम मजदूरी का समुचित वेज रिवीजन नहीं किया गया, जिससे लाखों मजदूर महंगाई के दौर में बेहद कम वेतन पर जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार ने 17 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना में मजदूरी पुनरीक्षण में हुई देरी को स्वीकार किया है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री द्वारा नोएडा श्रमिक आंदोलन के दौरान मई माह में वेज बोर्ड गठन, आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का वेतन सुधारने की जो घोषणाएं की गई थीं, उन पर आज तक अमल नहीं हुआ।

यदि सरकार वास्तव में उद्योगों और रोजगार को मजबूत करना चाहती है तो उसे श्रमिक विरोधी नीतियों को वापस लेना होगा, न्यूनतम मजदूरी बढ़ानी होगी, सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए ठोस कल्याणकारी योजनाएं लागू करनी होंगी तथा ट्रेड यूनियनों के साथ संवाद स्थापित करना होगा।

लोकतंत्र में असहमति और संगठन बनाने का अधिकार मूल आधार है, इसलिए ट्रेड यूनियनों को बदनाम करने के बजाय सरकार को श्रमिकों की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।

हसन ने मुख्यमंत्री से तत्काल अपने बयान पर पुनर्विचार करने, ट्रेड यूनियनों के खिलाफ दिए गए वक्तव्य को वापस लेने तथा श्रमिक संगठनों के साथ सम्मानजनक संवाद स्थापित करने की मांग की है।

जारीकर्ता
(अमजद हसन)
महासचिव: भारतीय राष्ट्रीय प्रवासी मज़दूर यूनियन एवं
दिल्ली असंगठित निर्माण मज़दूर यूनियन।

विश्व की सबसे बड़ी केंद्रीय ट्रेड यूनियन राष्ट्रीय मज़दूर कांग्रेस (इंटक) Indian National Trade Union Congress (INTUC) के...
02/05/2026

विश्व की सबसे बड़ी केंद्रीय ट्रेड यूनियन राष्ट्रीय मज़दूर कांग्रेस (इंटक) Indian National Trade Union Congress (INTUC) के स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं।

Many Greetings on the Foundation Day of the Indian National Trade Union Congress (INTUC).
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों से प्रेरित, Indian National Congress के दूरदर्शी नेताओं एवं प्रख्यात श्रमिक नेताओं की पहल से स्थापित INTUC ने देश के श्रमिक आंदोलन को एक संगठित, लोकतांत्रिक एवं सशक्त दिशा प्रदान की।

इसका मूल उद्देश्य सदैव श्रमिक वर्ग की सेवा, उनके अधिकारों की रक्षा तथा सामाजिक एवं आर्थिक न्याय सुनिश्चित करना रहा है।

INTUC ने अपने गठन से लेकर आज तक श्रमिकों के मौलिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों एवं न्यायपूर्ण वेतन के लिए निरंतर संघर्ष किया है।

संगठन ने निम्नलिखित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है— श्रमिक अधिकारों की रक्षा: न्यूनतम वेतन, समान कार्य के लिए समान वेतन, कार्य के घंटे निर्धारित करना तथा शोषण के खिलाफ आवाज उठाना।

सुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ (Safe Working Conditions): कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन, दुर्घटना रोकथाम, स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और श्रमिकों के लिए बीमा एवं मुआवजा सुनिश्चित करना।

सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण: पेंशन, ईएसआई, भविष्य निधि, मातृत्व लाभ एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका।
सामाजिक संवाद एवं भागीदारी (Participatory Democracy): सरकार, नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच संतुलन स्थापित कर एक सहभागी लोकतंत्र को बढ़ावा देना, जहाँ श्रमिकों की आवाज़ नीति निर्माण में सुनी जाए।

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का सशक्तिकरण: निर्माण, ठेका, घरेलू और अन्य असंगठित श्रमिकों को संगठन से जोड़कर उन्हें अधिकारों के प्रति जागरूक करना।

INTUC का दृष्टिकोण केवल अधिकारों की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उद्योग और श्रमिकों के बीच समन्वय, औद्योगिक शांति एवं राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों की भूमिका को सुदृढ़ करने की दिशा में भी कार्य करता है।

आज के इस महत्वपूर्ण दिवस पर हम सभी यह संकल्प लें कि— श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करेंगे, सुरक्षित, सम्मानजनक और न्यायपूर्ण कार्यस्थल सुनिश्चित करेंगे,
और एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देंगे जहाँ हर श्रमिक को गरिमा, सुरक्षा और अवसर प्राप्त हो।

INTUC के स्थापना दिवस पर सभी श्रमिक भाइयों-बहनों, पदाधिकारियों एवं समर्थकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।




अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के पावन अवसर पर आज नेशनल एलायंस फॉर लेबर राइट (NALR) द्वारा आयोजित “श्रमिक वर्ग के सशक्तिकरण” ...
02/05/2026

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के पावन अवसर पर आज नेशनल एलायंस फॉर लेबर राइट (NALR) द्वारा आयोजित “श्रमिक वर्ग के सशक्तिकरण” विषयक परिचर्चा में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हुआ।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में श्रमिकों के संवैधानिक, वैधानिक एवं मानवाधिकारों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर गंभीर एवं सार्थक विचार-विमर्श किया गया।

परिचर्चा के दौरान अपने विचार रखते हुए यह उल्लेख किया गया कि भारत के श्रमिक वर्ग को संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों के साथ-साथ विभिन्न श्रम कानूनों—जैसे Building and Other Construction Workers (Regulation of Employment and Conditions of Service) Act, 1996, Minimum Wages Act, 1948, Unorganized Workers’ Social Security Act, 2008 आदि—के तहत व्यापक सुरक्षा एवं कल्याणकारी प्रावधान उपलब्ध हैं। किन्तु व्यवहारिक स्तर पर इन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इस संदर्भ में यह भी रेखांकित किया गया कि श्रमिकों के सशक्तिकरण हेतु निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है—
श्रमिकों का पंजीकरण एवं पहचान सुनिश्चित करना,
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का पारदर्शी एवं समयबद्ध लाभ वितरण, कार्यस्थलों पर सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं गरिमा के अधिकार का संरक्षण, ट्रेड यूनियनों की स्वतंत्रता एवं उनकी भागीदारी को सुदृढ़ करना, श्रम कानूनों के उल्लंघन पर प्रभावी निगरानी एवं दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करना।

इसके अतिरिक्त, श्रमिकों के बीच जागरूकता का अभाव भी एक प्रमुख समस्या के रूप में सामने आया, जिसके समाधान हेतु संगठनों, सरकार एवं नागरिक समाज के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रमिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विशेषज्ञों ने एकमत होकर यह संकल्प लिया कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके जीवन स्तर में सुधार तथा सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए निरंतर संघर्ष एवं सहयोग जारी रखा जाएगा।

अंत में, अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के इस महत्वपूर्ण अवसर पर देश के सभी श्रमिक भाई-बहनों के योगदान को नमन करते हुए उनके अधिकारों की रक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करने हेतु सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई गई।

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) की हार्दिक  बधाई व शुभकामनाएं।इस अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर अमजद हसन, महासचिव: दिल्ली अ...
30/04/2026

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।

इस अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर अमजद हसन, महासचिव: दिल्ली असंगठित निर्माण मज़दूर यूनियन एवं भारतीय राष्ट्रीय प्रवासी मज़दूर यूनियन का विशेष लेख एवं संदेश।

विकास की नींव पसीने से बनती है, लेकिन न्याय के बिना वह नींव अन्याय का बोझ ढोती है।”

मजदूर साथियों, भाइयों और बहनों,
आज 1 मई—अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस—सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि संघर्ष, बलिदान और अधिकारों की उस ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है, जिसकी नींव 1886 के शिकागो के ‘हे मार्केट’ के शहीदों ने अपने खून से रखी थी। 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे अपने जीवन के लिए—यह अधिकार हमें किसी सरकार की दया से नहीं, बल्कि मजदूरों की एकजुट लड़ाई से मिला है।

लेकिन 2026 का भारत एक कड़वा सवाल पूछ रहा है- क्या वह मजदूर, जो गगनचुंबी इमारतें खड़ी करता है, खुद अपने जीवन में सम्मान और सुरक्षा की नींव खड़ी कर पाया है?

आज का यथार्थ: विकास बनाम शोषण दिल्ली-NCR, नोएडा और देशभर में विकास की रफ्तार तेज है, लेकिन इस विकास की कीमत मजदूर अपने खून-पसीने और कभी-कभी अपनी जान देकर चुका रहा है।

12 से 14 घंटे काम, लेकिन वेतन न्यूनतम जरूरतों से भी कम असुरक्षित कार्यस्थल, बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी बेल्ट दुर्घटनाओं में मौत, पर मुआवजा और न्याय वर्षों तक अधर में।

ठेकेदारी प्रथा के नाम पर खुलेआम आर्थिक शोषण यह केवल आर्थिक अन्याय नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का खुला उल्लंघन है।

श्रम कानूनों का कमजोर होता ढांचा जहां पहले 44 श्रम कानून मजदूरों की सुरक्षा का आधार थे, वहीं अब उन्हें 4 लेबर कोड में समेट दिया गया है।

“हायर एंड फायर” की नीति को बढ़ावा, ट्रेड यूनियनों की भूमिका सीमित करने का प्रयास श्रमिकों के अधिकारों को प्रक्रियात्मक जाल में उलझाना यह बदलाव श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करने की दिशा में एक गंभीर संकेत है।

ट्रेड यूनियनों पर बढ़ता दमन: आज स्थिति यह है कि— शांतिपूर्ण विरोध पर लाठीचार्ज, फर्जी मुकदमे दर्ज, यूनियन नेताओं को निशाना बनाना, पुलिस प्रशासन द्वारा डर और दबाव का माहौल
यह लोकतंत्र की आत्मा- अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता—पर सीधा हमला है।

महंगाई और मजदूरी का असंतुलन: मजदूर की आय बढ़ने की गति, महंगाई की रफ्तार से बहुत पीछे है— दिहाड़ी में सीमित वृद्धि, लेकिन खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल किराया, इलाज, शिक्षा—सब कुछ महंगा।

सामाजिक सुरक्षा लगभग नगण्य यह आर्थिक असमानता मजदूर को गरीबी के चक्रव्यूह में फंसा रही है।

महिला और प्रवासी मजदूर: दोहरी मार महिलाओं को समान काम के लिए कम वेतन, मातृत्व, स्वास्थ्य और सुरक्षा सुविधाओं का अभाव, प्रवासी मजदूरों के पास न राशन, न पहचान, न सामाजिक सुरक्षा
“वन नेशन, वन राशन” जैसी योजनाएं भी जमीनी स्तर पर अधूरी है।

प्रदूषण, हीट वेव: एक नया संकट, पर कोई ठोस सुरक्षा नहीं भीषण गर्मी में— 45°C से अधिक तापमान में काम न पर्याप्त पानी, न छाया, न विश्राम, हीट स्ट्रोक से मौतें, पर कोई जवाबदेही नहीं
यह स्पष्ट रूप से श्रम सुरक्षा मानकों और मानवाधिकारों की अनदेखी है।

मुख्य कानूनी और नीतिगत मांगें: हमारी यूनियन निम्नलिखित ठोस और वैधानिक मांगें रखती है:-

1. न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह (ILO मानकों के अनुसार) दिहाड़ी प्रथा समाप्त कर मासिक वेतन और DBT प्रणाली लागू हो।
2. लेबर कोड पर रोक और त्रिपक्षीय वार्ता (सरकार-नियोक्ता-मजदूर) शुरू हो।
3. हर मजदूर का अनिवार्य पंजीकरण (BOCW Act, 1996 के तहत)।
4. निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन, कार्यस्थल दुर्घटना पर ₹20 लाख मुआवजा व परिवार को स्थाई नौकरी।
5. हर जिले में फास्ट ट्रैक लेबर कोर्ट (90 दिन में फैसला)।
6. हीट वेव प्रोटोकॉल—काम के घंटे तय, ठंडा पानी, मेडिकल सुविधा अनिवार्य।
7. महिला मजदूरों के लिए समान वेतन और विशेष सुविधाएं।
8. ट्रेड यूनियन अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित हो।

संघर्ष का रास्ता: एकता और जागरूकता, दमनकारी ताकतें तब तक मजबूत हैं, जब तक हम बिखरे हैं। हमे एकता बनानी होगी, जाति, धर्म से ऊपर उठकर मजदूर पहचान को मजबूत करें और अपने अधिकार को जानें संवैधानिक संघर्ष, शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली आंदोलन।

अंतिम प्रश्न और संकल्प 1 मई को हम नारे लगाएंगे, रैलियां निकालेंगे, लाल सलाम देंगे। लेकिन 2 मई की सुबह मजदूर फिर उसी संघर्ष में लौट जाएगा। तो सवाल वही है— “जिसने देश बनाया, क्या उसे उसका हक मिला?” जब तक इस सवाल का जवाब “नहीं” है, तब तक मजदूर दिवस उत्सव नहीं, संघर्ष का प्रतीक रहेगा।

आइए इस मजदूर दिवस पर संकल्प लें— हम अन्याय के खिलाफ खड़े रहेंगे, श्रम के सम्मान के लिए लड़ेंगे, और उस दिन तक लड़ेंगे, जब तक हर मजदूर को उसका हक, सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलती।

“मजदूरों की ताकत को कम मत समझो, ये वो हाथ हैं जो ईतिहास बदल देते हैं।”

इंकलाब- जिंदाबाद
दुनिया के मजदूरों एक हो! ✊

जारीकर्ता:-
(अमजद हसन)
महासचिव: दिल्ली असंगठित निर्माण मज़दूर यूनियन एवं भारतीय राष्ट्रीय प्रवासी मज़दूर।

निर्माण मज़दूर अधिकार अभियान (NMAA) प्रतिनिधिमंडल एवं सचिव, दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (DBOCWW)...
23/04/2026

निर्माण मज़दूर अधिकार अभियान (NMAA) प्रतिनिधिमंडल एवं सचिव, दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (DBOCWW) के मध्य बोर्ड मुख्यालय, विकास भवन-II, सिविल लाइंस, दिल्ली में बैठक हुई।

आज दिनांक 23 अप्रैल 2026 को निर्माण मज़दूर अधिकार अभियान (NMAA) के प्रतिनिधिमंडल एवं दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के सचिव महोदय के मध्य एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक निर्माण श्रमिकों के कल्याण, उनके वैधानिक अधिकारों के संरक्षण तथा BOCW Act, 1996 एवं Delhi BOCW Rules, 2002 के प्रभावी क्रियान्वयन के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

बैठक का उद्देश्य निम्नलिखित था:- निर्माण श्रमिकों से संबंधित लंबित समस्याओं का समाधान बोर्ड के निर्णयों के क्रियान्वयन की समीक्षा, माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों को सुदृढ़ करना।

प्रतिनिधिमंडल द्वारा सचिव महोदय को एक विस्तृत ज्ञापन (Memorandum) भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें श्रमिक हितों से जुड़े प्रमुख मुद्दे सम्मिलित थे।

बैठक के प्रमुख बिंदु:-
1. ज्ञापन पर विचार एवं सुनवाई प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत सभी बिंदुओं को सचिव महोदय द्वारा गंभीरता से सुना गया। प्रत्येक मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की गई तथा यह सुनिश्चित किया गया कि विषय वस्तु प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Principles of Natural Justice) के अनुरूप विचाराधीन रहे।

2. बोर्ड के निर्णयों का प्रभावी क्रियान्वयन यूनियनों द्वारा पूर्व में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन में देरी पर चिंता व्यक्त की गई। यह इंगित किया गया कि निर्णयों का अनुपालन न होना प्रशासनिक जवाबदेही (Administrative Accountability) के विरुद्ध है। सचिव महोदय ने इस विषय में सुधारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

3. कर्मिक सेवा केंद्र से संबंधित निर्णयों की समीक्षा कर पारदर्शिता बढ़ाने पर सहमति बनी।

4. यूनियन प्रतिनिधित्व का अधिकार यूनियनों ने बोर्ड में स्थायी सदस्य (Permanent Representation) के रूप में शामिल किए जाने की मांग रखी। यह मांग श्रमिकों के सहभागिता के अधिकार (Right to Participation) के सिद्धांत पर आधारित है। सचिव महोदय ने इस सुझाव को सकारात्मक रूप से संज्ञान में लिया।

5. सूचना में पारदर्शिता (Transparency & Accountability) सचिव महोदय द्वारा आश्वासन दिया गया कि: सभी परिपत्र, आदेश एवं निर्णय ई-मेल के माध्यम से साझा किए जाएंगे बोर्ड स्तर पर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) की भावना के अनुरूप पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी साथ ही, बोर्ड प्रबंधक को क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया।

6. शाहदरा जिले में लंबित आवेदन प्रतिनिधिमंडल द्वारा यह गंभीर मुद्दा उठाया गया कि: आवेदन लंबित होने के कारण श्रमिक GRAP-III एवं GRAP-IV के तहत मिलने वाले निर्वाह भत्ते से वंचित रहे यह स्थिति श्रमिकों के जीविका के अधिकार (Right to Livelihood) को प्रभावित करती है सचिव द्वारा शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया।

7. स्टाफ ट्रांसफर एवं प्रशासनिक सुधार सचिव ने बताया कि: लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाएगा यह कदम भ्रष्टाचार एवं पक्षपात की संभावनाओं को कम करने हेतु महत्वपूर्ण है।

8. GRAP-IV सत्यापन प्रक्रिया सत्यापन प्रक्रिया 1-2 दिनों में प्रारंभ की जाएगी यह प्रक्रिया भौतिक (Physical Mode) में होगी। आधार कार्ड एवं हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे सभी डेटा वेब पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे यह कदम डिजिटल पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व (Digital Accountability) को मजबूत करेगा।

9. छात्रवृत्ति से संबंधित मुद्दे प्रतिनिधिमंडल द्वारा निम्न बिंदु उठाए गए: कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही वर्ष 2021–2025 तक की छात्रवृत्ति लंबित है यह विषय समान अवसर के अधिकार (Right to Equality in Education) से संबंधित है। सचिव जी ने, न्यायालय के आदेशों की समीक्षा लंबित भुगतान जारी करने हेतु आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

10. भुगतान संबंधी समस्याएं आधार मैपिंग के कारण विफल भुगतान मामलों को शीघ्र निपटाने का आश्वासन दिया गया यह प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक है।

11. सत्यापन में अनियमितताएं यूनियनों ने आरोप लगाया कि: यूनियन से जुड़े श्रमिकों के आवेदन अस्वीकृत हो रहे हैं जबकि स्वयं प्रमाणित श्रमिकों को लाभ दिया जा रहा है यह स्थिति समानता के अधिकार (Article 14) का उल्लंघन है। सचिव द्वारा निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया।

12. GRAP-III में फर्जी रिपोर्ट फर्जी सत्यापन रिपोर्ट की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया गया।

13. कानूनी एवं तकनीकी सुझाव पूर्व बोर्ड सदस्य अमजद हसन द्वारा दिए गए सुझाव: BOCW Act, 1996 एवं Rules, 2002 के अनुरूप सुधार योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन हेतु तकनीकी सुझाव सचिव द्वारा इन्हें सकारात्मक रूप से संज्ञान में लिया गया।

14. मजदूर दिवस (1 मई) कार्यक्रम सभी यूनियनों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आश्वासन यह श्रमिक एकता एवं सामाजिक संवाद (Social Dialogue) को बढ़ावा देगा।

15. अगली बैठक उठाए गए मुद्दों की समीक्षा हेतु शीघ्र अगली बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी।

इस बैठक में यूनियन के तरफ से निम्नलिखित प्रतिनिधि अमजद हसन, विनय सिंह, सुमित कुमार ख़ालिद रजा खान, बागेश तिवारी, अमिता उप्पल, सीमा सिंह, मुनिल पासवान, जोगिंदर पाल, एम.डी. अविद, मोहम्मद रियाज़, संदीप सिरोहा, श्वेता सिंह, जयप्रकाश सोलंकी एवं सुनीता अग्रवाल उपस्थित हुए।

निष्कर्ष:- यह बैठक श्रमिक हितों की दृष्टि से सकारात्मक एवं परिणामोन्मुख रही।

बोर्ड के सभी निर्णयों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

श्रमिकों के पंजीकरण एवं सत्यापन प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाया जाए।

लंबित छात्रवृत्ति एवं भुगतान मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए।

यूनियन प्रतिनिधित्व को संस्थागत रूप दिया जाए।

सभी योजनाओं में समानता एवं भेदभाव-रहित नीति अपनाई जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने सचिव महोदय के सकारात्मक दृष्टिकोण एवं आश्वासनों के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। यह अपेक्षा व्यक्त की गई कि सभी बिंदुओं पर शीघ्र, प्रभावी एवं विधिसम्मत कार्यवाही की जाएगी, जिससे निर्माण श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके।

अंततः धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक का समापन किया गया।
द्वारा जारी:-
(अमज़द हसन)
सचिवालय: निर्माण मज़दूर अधिकार अभियान - (NMAA)।

आज का दिन मेरे लिए अत्यंत गौरव, सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है।हमारे मार्गदर्शक, संरक्षक, प्रेरणास्रोत एवं अभिभावक, र...
21/04/2026

आज का दिन मेरे लिए अत्यंत गौरव, सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है।

हमारे मार्गदर्शक, संरक्षक, प्रेरणास्रोत एवं अभिभावक, राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं भारतीय राष्ट्रीय प्रवासी मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय डॉ. रामा चन्द्र खूंटियां जी (पूर्व सांसद) द्वारा आज भारतीय राष्ट्रीय प्रवासी मजदूर यूनियन का पुनर्गठन किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उन्होंने मुझ पर विश्वास व्यक्त करते हुए मुझे राष्ट्रीय महासचिव के पद पर नियुक्त किया है।

मैं आदरणीय अध्यक्ष महोदय का हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करता हूँ, साथ ही संगठन के सभी वरिष्ठ नेताओं एवं साथियों के प्रति भी अपनी कृतज्ञता प्रकट करता हूँ, जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया। यह नियुक्ति मेरे लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि करोड़ों मजदूर भाइयों-बहनों की सेवा, अधिकारों की रक्षा और उनके सम्मान की लड़ाई को और मजबूती से आगे बढ़ाने का अवसर है।

मैं यह विश्वास दिलाता हूँ कि जिस भरोसे और अपेक्षाओं के साथ मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे मैं पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं अथक परिश्रम के साथ निभाने का हर संभव प्रयास करूँगा। संगठन को मजबूत बनाने, प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को प्राथमिकता से उठाने तथा उनके अधिकारों के संरक्षण हेतु सदैव समर्पित रहूँगा।

आप सभी साथियों से अपील है कि अपने मार्गदर्शन, सहयोग एवं समर्थन से संगठन को और अधिक सशक्त बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें, ताकि हम मिलकर मजदूर वर्ग के हितों की रक्षा के लिए एक सशक्त आवाज बन सकें।

एक बार पुनः आप सभी का हृदय से धन्यवाद।
इंकलाब जिंदाबाद
मजदूर एकता जिंदाबाद

14/04/2026

मजदूरों के अधिकार, न्यूनतम मजदूरी एवं कार्य परिस्थितियों के संदर्भ में।

प्रदेश के मजदूरों के लिए न्यायसंगत न्यूनतम मजदूरी, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड के तत्काल गठन एवं अन्य सुविधाओं को लेकर भारतीय राष्ट्रीय प्रवासी मज़दूर यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव अमजद हसन ने उत्तर प्रदेश में माननीय मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वैधानिक मांग की।

प्रेस को जारी अपने बयान में कहा कि आज पूरे उत्तर प्रदेश के मजदूर—चाहे वे नोएडा के होजरी कॉम्प्लेक्स में कार्यरत हों या प्रदेश के अन्य जनपदों में गारमेंट, निर्माण, लघु उद्योग, दुकानों, परिवहन एवं कृषि क्षेत्रों में कार्यरत—अत्यंत दयनीय एवं शोषणपूर्ण परिस्थितियों में जीवनयापन करने को विवश हैं।

वर्तमान परिस्थितियों में 10-12 घंटे तक कठोर परिश्रम करने के उपरांत भी अधिकांश मजदूरों को मात्र ₹9,000 से ₹15,000 प्रतिमाह का वेतन प्राप्त हो रहा है, जो कि वर्तमान महंगाई, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जीवन-निर्वाह की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अत्यंत अपर्याप्त है।

दिनांक 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दरें निम्नानुसार हैं:
अकुशल श्रमिक: ₹11,314 प्रति माह
अर्ध-कुशल श्रमिक: ₹12,445 प्रति माह
कुशल श्रमिक: ₹13,940 प्रति माह उक्त निर्धारित मजदूरी दरें भी वर्तमान जीवनयापन की वास्तविक लागत की तुलना में अत्यंत न्यून हैं, जिससे मजदूर वर्ग आर्थिक, सामाजिक एवं मानसिक संकट से गुजर रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहां लगभग 24 करोड़ की आबादी निवास करती है तथा e-Shram पोर्टल पर 8 करोड़ 41 लाख से अधिक असंगठित क्षेत्र के मजदूर पंजीकृत हैं। इसके बावजूद अधिकांश श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं, जहां— कोई लिखित अनुबंध उपलब्ध नहीं है, ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता, सामाजिक सुरक्षा का अभाव है, तथा कार्यस्थलों पर सुरक्षा एवं सम्मानजनक वातावरण का घोर अभाव है।

यह स्थिति स्पष्ट रूप से श्रम कानूनों के उल्लंघन एवं श्रमिक अधिकारों के हनन को दर्शाती है। श्रम विभाग की निष्क्रियता एवं निगरानी की कमी के कारण यह समस्या और अधिक गंभीर होती जा रही है।

सबसे गंभीर तथ्य यह है कि वर्ष 2019 से अब तक प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि श्रमिकों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों के प्रत्यक्ष उल्लंघन के समान है। सलाहकार बोर्ड के अभाव में— मजदूरी निर्धारण की प्रक्रिया बाधित है, वेतन संशोधन में अनावश्यक विलंब हो रहा है, पारदर्शिता समाप्त हो रही है, एवं श्रमिकों का शोषण निरंतर बढ़ रहा है।

निम्नलिखित मांगें न्यायोचित एवं अत्यावश्यक हैं:-
1. न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड का तत्काल गठन किया जाए।
2. सभी क्षेत्रों में “समान कार्य हेतु समान वेतन” का सिद्धांत लागू किया जाए।
3. न्यूनतम मजदूरी को कम से कम ₹25,000 प्रतिमाह (8 घंटे की शिफ्ट हेतु) निर्धारित किया जाए।
4. ओवरटाइम का भुगतान विधि अनुसार दोगुना सुनिश्चित किया जाए।
5. सभी श्रमिकों के लिए लिखित अनुबंध, समय पर वेतन एवं नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
6. कार्यस्थलों पर सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण की गारंटी दी जाए।
7. श्रम कानूनों के उल्लंघन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

यहाँ ध्यान देने की जरूरत है आज मजदूर केवल आर्थिक अभाव से नहीं, बल्कि असमानता, उपेक्षा एवं असुरक्षा की पीड़ा से भी जूझ रहा है। जिस श्रमिक के श्रम से प्रदेश एवं देश की अर्थव्यवस्था गतिमान है, वही आज अपने परिवार के लिए दो समय की रोटी, बच्चों की शिक्षा और उपचार की मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।

नोएडा के होजरी कॉम्प्लेक्स में चल रहा मजदूर आंदोलन केवल एक क्षेत्र विशेष का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के करोड़ों मजदूरों की व्यथा, आक्रोश एवं न्याय की पुकार है। यदि समय रहते इस पीड़ा को नहीं सुना गया, तो यह असंतोष व्यापक सामाजिक असंतुलन का रूप ले सकता है।

मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध करता हुँ कि इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाएं, श्रमिक संगठनों के साथ संवाद स्थापित करें एवं एक न्यायपूर्ण, पारदर्शी एवं मानवीय समाधान सुनिश्चित करें।

“मजदूर सशक्त होगा, तभी उत्तर प्रदेश सशक्त होगा, और तभी राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा।”

जारीकर्ता:
(अमजद हसन)
राष्ट्रीय महासचिव: भारतीय राष्ट्रीय प्रवासी मजदूर यूनियन एवं राष्ट्रीय संगठन सचिव: राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक)

मजदूर एकता जिंदाबाद!

न्यायपूर्ण मजदूरी हर मजदूर का अधिकार है!

जय हिंद! जय उत्तर प्रदेश!

12/04/2026
गुड फ्राइडे का यह पावन दिवस हमें त्याग, प्रेम और मानवता की उस महान सीख की याद दिलाता है, जिसे प्रभु यीशु मसीह ने अपने जी...
02/04/2026

गुड फ्राइडे का यह पावन दिवस हमें त्याग, प्रेम और मानवता की उस महान सीख की याद दिलाता है, जिसे प्रभु यीशु मसीह ने अपने जीवन के बलिदान से संसार को दिया।
यह दिन हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी क्षमा, करुणा और सत्य का मार्ग ही सबसे श्रेष्ठ होता है।

आइए, इस गुड फ्राइडे पर हम अपने भीतर की नफरत, अहंकार और बुराइयों को त्यागकर प्रेम, शांति और भाईचारे को अपनाने का संकल्प लें।
प्रभु का यह त्याग हम सभी के जीवन में नई आशा, शक्ति और सकारात्मकता का संचार करे।

आप सभी को गुड फ्राइडे की भावपूर्ण श्रद्धांजलि एवं शांति की मंगलकामनाएँ।

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