30/04/2026
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।
इस अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर अमजद हसन, महासचिव: दिल्ली असंगठित निर्माण मज़दूर यूनियन एवं भारतीय राष्ट्रीय प्रवासी मज़दूर यूनियन का विशेष लेख एवं संदेश।
विकास की नींव पसीने से बनती है, लेकिन न्याय के बिना वह नींव अन्याय का बोझ ढोती है।”
मजदूर साथियों, भाइयों और बहनों,
आज 1 मई—अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस—सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि संघर्ष, बलिदान और अधिकारों की उस ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है, जिसकी नींव 1886 के शिकागो के ‘हे मार्केट’ के शहीदों ने अपने खून से रखी थी। 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे अपने जीवन के लिए—यह अधिकार हमें किसी सरकार की दया से नहीं, बल्कि मजदूरों की एकजुट लड़ाई से मिला है।
लेकिन 2026 का भारत एक कड़वा सवाल पूछ रहा है- क्या वह मजदूर, जो गगनचुंबी इमारतें खड़ी करता है, खुद अपने जीवन में सम्मान और सुरक्षा की नींव खड़ी कर पाया है?
आज का यथार्थ: विकास बनाम शोषण दिल्ली-NCR, नोएडा और देशभर में विकास की रफ्तार तेज है, लेकिन इस विकास की कीमत मजदूर अपने खून-पसीने और कभी-कभी अपनी जान देकर चुका रहा है।
12 से 14 घंटे काम, लेकिन वेतन न्यूनतम जरूरतों से भी कम असुरक्षित कार्यस्थल, बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी बेल्ट दुर्घटनाओं में मौत, पर मुआवजा और न्याय वर्षों तक अधर में।
ठेकेदारी प्रथा के नाम पर खुलेआम आर्थिक शोषण यह केवल आर्थिक अन्याय नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का खुला उल्लंघन है।
श्रम कानूनों का कमजोर होता ढांचा जहां पहले 44 श्रम कानून मजदूरों की सुरक्षा का आधार थे, वहीं अब उन्हें 4 लेबर कोड में समेट दिया गया है।
“हायर एंड फायर” की नीति को बढ़ावा, ट्रेड यूनियनों की भूमिका सीमित करने का प्रयास श्रमिकों के अधिकारों को प्रक्रियात्मक जाल में उलझाना यह बदलाव श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करने की दिशा में एक गंभीर संकेत है।
ट्रेड यूनियनों पर बढ़ता दमन: आज स्थिति यह है कि— शांतिपूर्ण विरोध पर लाठीचार्ज, फर्जी मुकदमे दर्ज, यूनियन नेताओं को निशाना बनाना, पुलिस प्रशासन द्वारा डर और दबाव का माहौल
यह लोकतंत्र की आत्मा- अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता—पर सीधा हमला है।
महंगाई और मजदूरी का असंतुलन: मजदूर की आय बढ़ने की गति, महंगाई की रफ्तार से बहुत पीछे है— दिहाड़ी में सीमित वृद्धि, लेकिन खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल किराया, इलाज, शिक्षा—सब कुछ महंगा।
सामाजिक सुरक्षा लगभग नगण्य यह आर्थिक असमानता मजदूर को गरीबी के चक्रव्यूह में फंसा रही है।
महिला और प्रवासी मजदूर: दोहरी मार महिलाओं को समान काम के लिए कम वेतन, मातृत्व, स्वास्थ्य और सुरक्षा सुविधाओं का अभाव, प्रवासी मजदूरों के पास न राशन, न पहचान, न सामाजिक सुरक्षा
“वन नेशन, वन राशन” जैसी योजनाएं भी जमीनी स्तर पर अधूरी है।
प्रदूषण, हीट वेव: एक नया संकट, पर कोई ठोस सुरक्षा नहीं भीषण गर्मी में— 45°C से अधिक तापमान में काम न पर्याप्त पानी, न छाया, न विश्राम, हीट स्ट्रोक से मौतें, पर कोई जवाबदेही नहीं
यह स्पष्ट रूप से श्रम सुरक्षा मानकों और मानवाधिकारों की अनदेखी है।
मुख्य कानूनी और नीतिगत मांगें: हमारी यूनियन निम्नलिखित ठोस और वैधानिक मांगें रखती है:-
1. न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह (ILO मानकों के अनुसार) दिहाड़ी प्रथा समाप्त कर मासिक वेतन और DBT प्रणाली लागू हो।
2. लेबर कोड पर रोक और त्रिपक्षीय वार्ता (सरकार-नियोक्ता-मजदूर) शुरू हो।
3. हर मजदूर का अनिवार्य पंजीकरण (BOCW Act, 1996 के तहत)।
4. निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन, कार्यस्थल दुर्घटना पर ₹20 लाख मुआवजा व परिवार को स्थाई नौकरी।
5. हर जिले में फास्ट ट्रैक लेबर कोर्ट (90 दिन में फैसला)।
6. हीट वेव प्रोटोकॉल—काम के घंटे तय, ठंडा पानी, मेडिकल सुविधा अनिवार्य।
7. महिला मजदूरों के लिए समान वेतन और विशेष सुविधाएं।
8. ट्रेड यूनियन अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित हो।
संघर्ष का रास्ता: एकता और जागरूकता, दमनकारी ताकतें तब तक मजबूत हैं, जब तक हम बिखरे हैं। हमे एकता बनानी होगी, जाति, धर्म से ऊपर उठकर मजदूर पहचान को मजबूत करें और अपने अधिकार को जानें संवैधानिक संघर्ष, शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली आंदोलन।
अंतिम प्रश्न और संकल्प 1 मई को हम नारे लगाएंगे, रैलियां निकालेंगे, लाल सलाम देंगे। लेकिन 2 मई की सुबह मजदूर फिर उसी संघर्ष में लौट जाएगा। तो सवाल वही है— “जिसने देश बनाया, क्या उसे उसका हक मिला?” जब तक इस सवाल का जवाब “नहीं” है, तब तक मजदूर दिवस उत्सव नहीं, संघर्ष का प्रतीक रहेगा।
आइए इस मजदूर दिवस पर संकल्प लें— हम अन्याय के खिलाफ खड़े रहेंगे, श्रम के सम्मान के लिए लड़ेंगे, और उस दिन तक लड़ेंगे, जब तक हर मजदूर को उसका हक, सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलती।
“मजदूरों की ताकत को कम मत समझो, ये वो हाथ हैं जो ईतिहास बदल देते हैं।”
इंकलाब- जिंदाबाद
दुनिया के मजदूरों एक हो! ✊
जारीकर्ता:-
(अमजद हसन)
महासचिव: दिल्ली असंगठित निर्माण मज़दूर यूनियन एवं भारतीय राष्ट्रीय प्रवासी मज़दूर।