18/06/2026
हाल ही यह खबर आभासी पटल पर आई थी। इस मुस्लिम महिला ने हलाल_ब्याज देने के नाम पर गरीब_अशिक्षित_मुसलमानों से 3000 करोड़ ₹ झटक लिए। किसी चैनल ने खबर उठाई? मुस्लिम_समाज ने हाय-तौबा किया? छाती पीटी? खबर आई और गई, कुछ घण्टों में सन्नाटा पसर गया।
सवाल है, क्या हलाल_ब्याज आस्था पर चोट नहीं है? क्योंकि कुरान में हलाल_ब्याज की कोई व्यवस्था ही नहीं है। बल्कि कुरान में आठ जगह अल्लाह कहते हैं, "...ब्याज खाने वालों से मेरी सीधी जंग होगी।" लेकिन भारत के मुसलमान ने, यहां आस्था के मुकाबले हुकूमत को तरजीह दी। अपनी इस्लामिक हुकूमत।
कारण साफ है, एक आम या खास मुसलमान अच्छी तरह जानता है, स्टेट_कैप्चर क्या है? बच्चे-बच्चे को अच्छे से पता है, भारत को शरिया_कानून के तहत लाना है। निजाम_ए_खिलाफत बनाना है।
जब मकसद साफ है तो यह भी पता है, कहां और किस मुद्दे पर बोलना है? कहां चुप हो जाना है। ..इसी को साझा_सहमति कहते हैं। यह सहमति आस्था से आती है। अब आप कितना भी कोसिए? या बिसरे? पर यही हुकुमत_की_जंग है। आप कहते रहें, अधर्मी हैं! राक्षस हैं! पर राक्षस ही तो हमेशा एकजुट रहे हैं।
इधर देखिए, 3000 करोड़ के मुकाबले 200 करोड़ का घपला। लेकिन श्रीराम मंदिर को धेला दान ना देने वाला ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य, पिछड़ा, दलित जुट गया है, तख्तापलट के अभियान में सबसे आगे है।
पिछले 12 वर्षों से देख रहा हूं, हिंदुओं को सम्मान स्वीकार नहीं। बहन-बेटियों का स्वतन्त्र और भयमुक्त जीवन कबूल नहीं। थोड़ी सी राशि के इधर से उधर होने और रुदाली किरदार में तत्काल उतर आए। आस्था और विश्वास दोनों हिल गया। अपने नेतृत्व Narendra Modi और Yogi Adityanath पर विश्वास ही नहीं। धैर्य की अत्यंत कमी।
मेरे लिए हर संघर्ष, हर मान-अपमान सत्ता_संघर्ष है, और हर संघर्ष में प्रभु_श्रीराम उपस्थित हैं।