19/06/2026
देश के ग्रामीण क्षेत्र में एक दो नहीं, हजारों मंदिर ऐसे हैं जहां दीवालों पर दशकों से चूना नहीं फेरा गया। अधिकांश मंदिरों में पुजारी को एक रुपया वेतन नहीं मिलता, वे अपनी श्रद्धा से सेवा करते हैं। भला हो प्रदीप मिश्र, अनिरुद्धाचार्य जैसे कथावाचकों का जिनके कारण नियमित मंदिर जाने लगी स्त्रियां भोर भोर में मंदिर धो देती हैं, वरना देश में ऐसे भी मंदिरों की संख्या बहुत बड़ी है जहां दस बाल्टी पानी फेंक कर गर्भगृह धोने वाला कोई नहीं।
गर्मी के दिनों में केदार - बद्री की यात्रा पर जा कर हजारों दान करने वालों में से कितने लोग अपने गांव के मंदिर में जा कर पता करते हैं कि भगवान को रोज भोग भी लग रहा है या नहीं? आश्चर्य न कीजियेगा, गांव के नब्बे फीसदी लोगों को अब मंदिर की व्यवस्था से कोई लेना देना नहीं होता।
एक तरफ देश के अधिकांश मंदिरों में सुबह शाम आरती के समय पांच लोग नहीं पहुंचते, और दूसरी तरह एक एक मंदिर में रोज लाखों की भीड़ खड़ी है। यह किस टाइप की श्रद्धा है? छोटे मंदिरों में रोज धूप अगरबत्ती की व्यवस्था नहीं और किसी किसी मंदिर में एक दिन में ही एक करोड़ का चढ़ावा? यह किस प्रकार का समर्पण है?
हमारे जैसे असंख्य लोग प्रारंभ से ही कहते रहे हैं कि सरकार अधिकृत मंदिरों में हजारों लाखों उझीलने से बेहतर है कि अपने गांव या पड़ोस के मंदिर की व्यवस्था देख लीजिए। वहां भोग लगा रहे पुजारी की प्राथमिक आवश्यकताओं का ध्यान रख लीजिए, दिवालों से झड़ रहे प्लास्टर की चिंता कर लीजिए, यह अधिक पुण्य का काम है। बड़े मंदिरों की दानपेटी में डाला गया रुपया किस कार्य में खर्च होगा, यह किसी को पता नहीं होता...
आपलोगों में से अनेक होंगे जो राम मंदिर बनने के बाद एकाधिक बार अयोध्याजी घूम आए होंगे। आपको पता है, वहां और भी सैकड़ों मंदिर हैं। अनेक सिद्ध पीठ हैं, हजार वर्ष पुराने मंदिर हैं। कितनों में गए होंगे? तनिक सोचिए तो, अब वहां कौन जाता होगा? उन मंदिरों की व्यवस्था कैसे चलती होगी?
अयोध्याजी वाले प्रकरण की बहुत चर्चा है। आप किस तरह भरोसा कर पा रहे थे कि वहां चोरी नहीं होगी? सरकारी व्यवस्था में कर्मियों के चयन में श्रद्धा या भक्ति भाव की कोई भूमिका नहीं होती दोस्त, फिर वहां काम करने वाले व्यक्ति से आप यह आशा कैसे कर सकते हैं कि करोड़ों की राशि देख कर उसका मन नहीं डोलेगा?
बात केवल अयोध्याजी की नहीं है, व्यक्तिगत रूप से मैं सरकारी कब्जे वाले वैसे किसी भी मंदिर की व्यवस्था में कर्मियों के पूर्ण निष्ठावान होने के दावे पर भरोसा नहीं कर पाऊंगा, जहां करोड़ों का चढ़ावा आता हो। अयोध्याजी में जो हुआ उसके होने की संभावना हमेशा बनी रहेगी। आप A को हटा कर B को लाइए या B को हटा कर C को लाइए, जो हुआ है वह कभी भी हो सकता है...
यह अत्यंत आवश्यक है कि सरकार अयोध्याजी के दोषियों को पकड़े, उन्हें कठोर दण्ड दे, उनका सामाजिक बहिष्कार हो। पर उसके बाद भी ऐसी घटनाओं की संभावना सदैव बनी रहेगी। तो बेहतर है कि आप अपना धन उन मंदिरों में खर्च करें जहां सचमुच आवश्यकता है। अपने पड़ोस में ही ढूंढिए न, दर्जनों मंदिर दिख जाएंगे।