13/10/2025
सुकून…
ये कोई जगह नहीं होती, कोई इंसान नहीं होता,
बल्कि वो एहसास होता है — जब दिल अचानक बहुत हल्का महसूस करता है।
जब किसी बात का जवाब ढूंढना ज़रूरी नहीं लगता,
जब चुप्पी बोझ नहीं लगती… बल्कि मरहम बन जाती है।
सुकून तब मिलता है,
जब दिनभर की थकान के बाद किसी पुराने गाने की धुन कानों में उतरती है,
जब बारिश की बूँदें ज़मीन पर गिरकर मिट्टी की खुशबू बन जाती हैं,
या जब कोई अपना बिना कुछ कहे बस मुस्कुरा कर देख ले।
कभी सुकून किसी कॉफ़ी के प्याले में छिपा होता है,
कभी किसी अधूरे खत में,
कभी किसी याद में जो बार-बार लौटकर आती है…
और कभी किसी "कैसे हो?" जैसे साधारण सवाल में भी।
ज़िंदगी की दौड़ में हम अक्सर सुकून को ढूंढते हैं —
कभी बड़ी-बड़ी कामयाबियों में,
कभी उन चीज़ों में जिन्हें पाने की हड़बड़ी में हम खुद को खो देते हैं।
पर असल में सुकून वहीं होता है जहाँ सच्चाई, अपनापन और थोड़ी सी खामोशी हो।
कभी-कभी सुकून पाने के लिए बस इतना करना होता है —
थोड़ा रुक जाना,
गहरी साँस लेना,
और खुद से कहना —
"सब ठीक है… और अगर नहीं भी है, तो हो जाएगा।" 💫